PICTORIAL EVIDENCE
मंगलवार, 30 अगस्त 2022
खिड़की के उस तरफ एक अकेली शाम/फोटो :अजामिल
रविवार, 28 अगस्त 2022
अंजू त्रिपाठी की कविता
बूपी /फोटो:अजामिल
रोहतांग जाते हुए/ फोटो: अजामिल
बूपी:फ़ोटो:अजामिल
कुफ़री बाज़ार/ फोटो:अजामिल
अपनी बारी का इंतज़ार:lमनाली में laddu घोड़ों अड्डे पर/फोटो:अजामिल
कुफ़री ,हिमांचल में lddu घोड़ों के अड्डा।/फोटो:अजामिल
मनाली, हिमांचल में कुफ़री के पास एक रेस्तरां/फोटो:अजामिल
शनिवार, 27 अगस्त 2022
संगम के पास का यह द्रश्य रोमांचित कर देता है। कवि गुरु डाक्टर जगदीश गुप्त ने इस द्रश्य को देखकर अपनी एक कविता में कल्पना की थी क़ि गंगा के उपर बने इस रेलवे पुल को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी नव यौवना स्त्री ने अपने खुले लहराते केशों में कंघा खोंस लिया हो और बेखबर होकर आकाश को निहार रही है। मुझे भी इस द्रश्य ने अपनी और आकर्षित किया। नतीजा यह वाइड एंगिल तस्वीर।... जल केशों पर कंघा पुल छाया: अजामिल
शुक्रवार, 26 अगस्त 2022
अपनी अपनी गोट: फोटो: अजामिल
बुजुर्ग: बस इंतज़ार/ फोटो:अजामिल
बुजुर्ग: कोई काम न आया/ फोटो:अजामिल
बरगद घाट, इलाहाबाद, फोटो:अजामिल
भुट्टा, पैकेजिंग कला का अद्भुत नमूना, फोटो:अजामिल
बलुआघाट, फोटो अजामिल
निकिता गौतम, अजामिल
बूपी गौतम, फोटो:अजामिल
गुनगुन: फोटो:अजामिल
महाकुंभ, प्रयाग, फोटो:अजामिल
रामलीला लेखन के लिए सुप्रसिद्ध लोक गायिका तीजन बाई से सम्मान ग्रहण करते रंगकर्मी अजामिल
निकिता गौतम, स्केच:अजामिल
न्यू यमुना ब्रिज, अलाहाबाद, फोटो:अजामिल
बलुआघाट, अलाहाबाद, फोटो:अजामिल
बलुआघाट, इलाहाबाद, फोटो:अजामिल
बलुआ महादेव, इलाहाबाद, फोटो:अजामिल
बलुआघाट, इलाहाबाद, फोटो/अजामिल
फ़ोटो:अजामिल
बलुआ घाट, यमुना तट, प्रयागराज
कोलकाता 2021, फ़ोटो: अजामिल
गुनगुन: फोटो: अजामिल
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