सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

माघ मेला कि कुछ स्मृतियां

प्रयाग में होने वाला माघ मेला बड़े मनोरम दृश्य से भरा होता है जिस तरफ देखिए उत्सव ही उत्सव दिखाई देता है चारो तरफ लोग ही लोग होते हैं कहीं भंडारे चल रहे होते हैं तो कहीं पंटून पुल से होकर लोगों का आना जाना लगा रहता है यह एक ऐसा मेला होता है जिसमें इलाहाबाद और इलाहाबाद के आसपास के लोग तो एकत्र होते ही हैं देशभर से लोग माघ माह में विशेष पूजन अर्चन और कल्पवास के लिए आते हैं ।
आलेख एवं फोटो अजामिल

सानिध्य साहित्य चिंतक प्रोफैसर अमर सिंह का

आज यह तस्वीर मेरे और रवि नंदन सिंह जी के लिए एक यादगार तस्वीर हो गई प्रोफेसर अमर सिंह जी ने हिंदुस्तानी एकेडेमी की पत्रिका हिंदुस्तानी का सभी औपचारिकताओं के साथ विमोचन किया था इस अवसर पर मैं और मेरे प्रिय मित्र साहित्य आलोचक और कवि रविनंदन सिंह भी साथ थे प्रोफैसर अमर सिंह जी का सानिध्य हमेशा हमें नए ज्ञान और ऊर्जा से भरता रहा उनका ना होना पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है

शूटिंग की यादें : आइडिया 4जी का विज्ञापन

पिछले दिनों idea 4g के विज्ञापन की निर्माण प्रक्रिया के दौरान बजे शूटिंग में एक कलाकार की हैसियत से शामिल होने का अवसर मिला इस मौके पर मैंने कुछ तस्वीरें उतारी यह शूटिंग श्रृंगवेरपुर इलाहाबाद में गंगा नदी के तट पर हुई यह बहुत ही खूबसूरत और सुरम्य स्थान है यह विज्ञापन दो करोड़ की लागत से बना था और इस में इलाहाबाद के कुछ कलाकारों ने भाग लिया था इस शूटिंग की यादें हमारे लिए अविस्मरणीय है ।
सभी चित्र व आलेख अजामिल

आखिर उन्हें जाने की इतनी जल्दी क्या थी

बार बार एक सवाल मन में आता है कि आखिर अमर सिंह जी को दुनिया जहान छोड़ कर जाने की इतनी जल्दी भी क्या थी अभी पिछले दिनों गोपीकृष्ण गोपेश की अनुदित किताब विदेशों के महाकाव्य पर उन्होंने विशेष वक्तव्य दिया था उस दिन उनकी जाने की जल्दबाजी का कोई संकेत हमें नहीं मिला बल्कि वह बेहद शांत दिख रहे थे उस दिन उन्होंने सबसे मुलाकात की सबका हाल चाल लिया मैंने हमेशा की तरह उनके चरण स्पर्श किए तो उन्होंने आशीर्वाद दिया प्रोफेसर अमर सिंह उन लोगों में थे जो किसी भी कार्यक्रम में पहुंचे तो उस कार्यक्रम की गरिमा दोगुनी हो गई उनकी सबसे अच्छी बात यह थी कि वह सभी विषयों में और सभी लोगों में रुचि रखते थे अच्छे लोगों को पहचानने में उन्हें महारत हासिल थी उन्हें लल्लो-चप्पो करते कभी किसी ने नहीं देखा बेहद शांत रहते थे और आवश्यकता होने पर ही बोलते थे उनके पास विभिन्न विषयों पर तमाम ऐसी जानकारी होती थी जो अक्सर हमारी पहले सुनी हुई नहीं होती थी उनके चेहरे पर बिल्कुल बच्चों जैसी बहुत प्यारी सी मुस्कुराहट खेलती रहती थी आज भी हमें नहीं लगता कि प्रोफेसर अमर सिंह हमें छोड़ कर जा चुके हैं उनका इस दुनिया से जाना नामुमकिन है वह हमारी यादों में हमेशा बसे रहेंगे पिछली मुलाकात में मैंने उनकी कुछ तस्वीरें क्लिक की थी बहुत संकोच के साथ उन्होंने मुझे सहयोग किया अब नहीं है तो हमें उनकी यादों को सहेज कर रखना है क्योंकि उनके जैसे लोग आज की दुनिया में बहुत कम हो गए हैं उन की पीढ़ी लगभग हमें छोड़ कर जा चुकी है प्रोफेसर अमर सिंह रायबरेली के रहने वाले थे पर उनका मन पक्का इलाहाबादी था समकालीन मुक्तिबोध के साथ मिलकर मैं उन्हें अपना अंतिम प्रणाम पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित करता हूं सादर
आलेख एवं फोटो अजामिल

माघ मेला से वापसी

PICTORIAL EVIDENCE

माघ मेला से वापसी

प्रयाग का प्रतिवर्ष लगने वाला माघ मेला सिमट गया लाखो स्नानार्थी गंगा स्नान करके अपने अपने घरों की ओर वापस लौट गए आस्था की गठरी उनके सर पर थी यह सभी गंगा भक्त गाते बजाते हंसते खिलखिलाते चले जा रहे थे इनका उत्साह देख कर लगा की गंगा के प्रति इनकी श्रद्धा और विश्वास को दुनिया की कोई ताकत कम नहीं कर सकती ।
फोटो अजामिल

अनुशासन

संगम गंगा तट का एक मनमोहक नजारा इसे देखने के लिए प्रतिवर्ष लाखों लोग इलाहाबाद आते हैं।
फोटो अजामिल

धागा तंत्र

गांव देहात में और अब शहरों में भी लगने वाले मेलों में यह रंग बिरंगे धागे खूब बिक्री के लिए आते है आम और खास लोगों का यह विश्वास है कि इन धागो को गले में धारण करने से ईश्वर की कृपा बनी रहती है इन रेशमी धागों का व्यापार काफी बड़ा है
चित्र एवं टिप्पणी अजामिल