सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

बाबूजी खुश है

80 साल की उम्र में पहुंचे बाबूजी हर तरह से अपने को खुश रखने की कोशिश करते हैं कभी कभी मन उदास होता है तो कहते हैं कि बहुत जी लिया और कभी-कभी उत्साह से भर जाते हैं तो पुरानी बातों को याद करते हुए बच्चों से खुश होते हैं ईश्वर चर्चा उन्हें अच्छी लगती है शरीर को संभाले हुए हैं ताकि जाने की बेला तक कहीं कुछ ऐसा ना हो जिससे बच्चों को तकलीफ हो बहुत प्यारी सी हंसी है उनकी सब को प्यार करते हैं कोई नहीं आता तो चुपचाप रहकर मौन रहने का आनंद उठाते हैं बुरा न सोचते हैं न किसी का बुरा करते हैं निश्चल हैं इसलिए सब उनका आदर करते हैं ।
आलेख एवं फोटो अजामिल

गुनगुन एक लड़की दुल्हन सी

उसका प्यार का नाम गुनगुन है लेकिन असली नाम अंतरा कौशिक है गुनगुन को डांस का बहुत शौक है 5 साल की हैं लेकिन इस्कॉन के बड़े मंच पर गुनगुन ने बहुत अच्छी प्रस्तुतियां दी हैं कृष्ण और राधा कि उसने यादगार भूमिकाएं निभाई है गुनगुन डॉक्टर बनना चाहती हैं लेकिन कहीं भी संगीत सुनाई दे जाता है तो उसका पैर थिरकने लगता है
फोटो अजामिल

रविवार, 26 फ़रवरी 2017

नवीन शिशु वाटिका इलाहाबाद में धूमधाम से किया अपना वार्षिकोत्सव बच्चों ने की मनभावन प्रस्तुतियां इलाहाबाद के सुप्रसिद्ध शिक्षण संस्थान टैगोर पब्लिक स्कूल की शाखा नवीन शिशु वाटिका ने धूमधाम के साथ अपना वार्षिक उत्सव मनाया इस कार्यक्रम के खास मेहमान दूरदर्शन इलाहाबाद की कार्य कारी निर्देशिका तेजिंदर रही इस अवसर पर नन्हे मुन्ने बच्चों ने बहुत सारी रंगारंग प्रस्तुतियां की जिसे देख कर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए । चित्र व रिपोर्ट अजामिल






















एक था गधा उर्फ अलादाद खां , इलाहाबाद में हुई शरद जोशी के नाटक -एक था अलादाद खां -की प्रस्तुति । एक धांसू प्रोडक्शन । हास्य व्यंग और हास्यास्पद हास्य से लबरेज़ । रंगकर्मियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुकरणीय प्रस्तुति । निर्देशक और कलाकारों को बधाई । 370 कम 400 लोगो ने नाटक देखकर कहा -- वाह ।क्या बात है । छाया :अजामिल





**प्रयाग के सुप्रसिद्ध कूड़ाघर उत्तर प्रदेश के गंदे शहरों के बीच हुए सर्वेक्षण में इलाहाबाद को अपने शहर को गन्दा करने की पुरज़ोर कोशिश के बावजूद कम गंदे शहरों में तीसरे स्थान पर ससम्मान शुमार किया गया है । इस सम्मान को लेने के लिए इलाहाबाद की मेयर लाव लश्कर के साथ सम्मानित की गयीं । यूँ भी इलाहाबाद के कूड़ाघर यहां की गंदगी में चार चाँद लगाते हैं । नगर निगम की कृपा से पुराने इलाहाबाद शहर में एक हज़ार से ज़्यादा कूड़ाघर हैं जो इलाहाबाद की आन बान और शान को दोबाला करते हैं । इन कुदघरों की जान है छुट्टा जानवर जो कूड़े को पूरे क्षेत्र में फैलाने में नगर निगम का सहयोग करते है वर्ना ये काम नगर निगम अकेले कैसे करता । कुदाघरों के कारण लगभग सभी इलाकों में मच्छर हैं जो नयी बीमारियों को फैलाकर डाक्टरों की मदद करते हैं । वाकई इलाहाबाद एक गन्दा शहर है । शहर के कुछ सुप्रसिद्ध कूड़ाघर शहर की सुंदरता और आकर्षण का बड़े कारण हैं । नागरिकों को इन पर गर्व है । इसीलिए वे इधर उधर कूड़ा फेककर अपने मौलिक नैतिक कर्तव्य का पालन करते हैं । श्री मोदी जी के स्वच्छता अभियान की स्मृति को बनाये रखने के लिए ये ज़रूरी है क़ि इलाहाबाद के कूड़ाघरों के नाम महापुरुषों के नाम पर रखे जाएँ । ये प्रयास नगर निगम की एक अतिरिक्त आय का साधन भी बन सकता है । इलाहाबाद की सड़कों और कुड़ाघरों को छुट्टा और आवारा जानवरों के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता । नगर निगम के पशुधन अधिकारी इन जानवरों की अभिवयक्ति की स्वतंत्रता का भरपूर सम्मान करते हैं । ये आवारा जानवर इलाहाबाद शहर की सड़कों पर भागते जीवन की गति को कंट्रोल किये रहते हैं । कुड़ाघरों का अस्तित्व बनाये रखना चाहिए क्योकि ये 'चतुर ' श्रेणी के कर्मचारियों के अस्तित्व से भी जुड़ा है । कुड़ाघरों को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किये जाने की मांग भी ठलुए उठा सकते हैं । एक देशव्यापी आंदोलन चलाया जा सकता है । इलाहाबाद के कूड़ाघर मामूली कूड़ाघर नहीं है । इसमें स्वच्छता के प्रति हमारी गंभीर लापरवाही की सड़ांध पूरी शिद्दत से मौजूद है । कल को इलाहाबाद के कूड़ाघर एक विरासत के रूप में देखे जानेवाले हैं । बच्चों के लिए ये धरोहर होंगे । एक ऐसी धरोहर जो मनुष्य और गंदगी के रिश्तों को रेखांकित करेगी । ** हिदुस्तान ई मीडिया के लिए अजामिल की ख़ास रिपोर्ट छाया : अजामिल







आर.के.टंडन की छायाचित्र प्रदर्शनी कायनात इलाहाबाद के निराला सभागार में अवस्थित आर्ट गैलरी में प्रोफेसर आर.के.टंडन के वाइल्ड लाइफ़ पर आधारित छायाचित्रों की प्रदर्शनी कायनात लगाई गई। इस संग्रह में भरतपुर में आनेवाली देशी विदेशी चिडियों की जीवन चर्या को प्रदर्शित किया गया। इस मौके पर जुटे छायाकारों ने आर.के.टंडन के चित्रों की प्रसंशा की और कहा क़ि वाइल्ड लाइफ़ फोटोग्राफी एक मुश्किल साधना है जिसे ध्यान और धैर्य से ही साधा जा सकता है। काम का जूनून कमाल का होना चाहिए। चिड़ियाँ बड़ी मुडी होती हैं। छायाकार ने इसे बखूबी पेश किया किया है।आर.के.टंडन शौकिया छायाकार हैं। लेकिन काम में प्रोफिलिज्म के पक्षधर है। ये इनकी तीसरी छायाचित्र प्रदर्शनी है। इस आयोजन में जाने माने चित्रकार अजय जेटली का सहयोग मिल जाने से प्रदर्शनी की प्रस्तुति जानदार हो गई। लेख व छाया :अजामिल


अंजुमन प्रकाशन इलाहबाद से प्रकाशित होकर मेरा पहला काव्य संग्रह आ गया है। इसके पूर्व मेरी कविताएं कई राष्ट्रीय स्तर के संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। पत्र पत्रिकाओं में भी छपी है लेकिन स्वतंत्र रूप से यह पहला संग्रह है। इसकी भूमिका जानेमाने चर्चित वरिष्ठ कवि यश मालवीय ने लिखी है। संग्रह में 52 कविताएं हैं ।मेरे लिए यह बहुत ख़ुशी का मौका है ।ये घर में बेटी के जन्म जैसा है ।मुझे गर्व है क़ि इस संग्रह का आवरण मेरे कवि चित्रकार मित्र रोहित रुसिया ने बनाया है। और मेरे मित्र वीनस ने इसे बड़े मन से प्रकाशित किया है। इस अवसर पर आपका स्नेह और आशीष मुझे हौसला देगा। प्रतीक्षा है